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मनरेगा खत्म करने का फैसला राष्ट्रविरोधी, महात्मा गांधी का अपमान : कैलाश यादव

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रांची
प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने 15 दिसंबर 2025 को जारी प्रेस बयान में केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे राष्ट्रविरोधी फैसला बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर महात्मा गांधी के विचारों और सम्मान पर प्रहार है।
कैलाश यादव ने कहा कि दो दिन पहले ही राजद की ओर से मनरेगा का नाम बदलने के केंद्र सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई गई थी, और अब सदन में मनरेगा कानून 2005 को निरस्त कर नया कानून “विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” लाने का प्रस्ताव और भी चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि भारत महात्मा गांधी का देश है, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ादी दिलाई। गांधी का सपना एक ऐसे भारत का था, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग एकता और सद्भाव के साथ रहें। इसी विचारधारा के कारण भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ।


कैलाश यादव ने कहा कि “रघुपति राघव राजाराम” और “अल्लाह ईश्वर तेरो नाम” जैसे भजन केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की साझा सांस्कृतिक आत्मा हैं, जो हर भारतीय के मन में बसती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा ‘महात्मा’ कहे जाने के बाद ही गांधी राष्ट्रपिता के रूप में पहचाने गए। उन्होंने बताया कि यूपीए-1 सरकार के दौरान वर्ष 2005 में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह के प्रयास से मनरेगा कानून लागू किया गया था, जिसके तहत मजदूरों को 100 दिन का रोजगार गारंटी अधिकार मिला।
राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने की राजनीति कर रही है, जबकि जमीनी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजद मनरेगा को निरस्त करने के फैसले का पुरजोर विरोध करता है और इसे महात्मा गांधी का अपमान मानता है।
कैलाश यादव ने मांग की कि देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, पलायन और महंगाई को देखते हुए मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन किया जाए।


 

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